Aug 4, 2015

बेल करेले मक्खन माल



बोपट     चोपट    टोंटीवाल
डामर  मिट्टी  लसपस माल
खदरा  कछवा   शान शकाल
विज्ञापन विश्वासी जाल
बुरे   फंसे   मुंगेरी  लाल

लक्स  पीयर्स निरमा सिथाल
जय   हमाम   गंगा   डेटाल
मिक्सी मम  लवली   फेराल
क्रीम इमामी     इस्तेमाल
बेल करेले मक्खन माल
लगे समेटन   टोंटी लाल

निरखा दर्पण  रूप संभाल
वाह वाह रे टोंटी लाल
शाहरुख   से मोहक  बाल
ड्रीम गर्ल  के    जैसे  गाल
नाक कान सब उपमा   वाल
सुनील दत्त सा सुंदर   भाल

पर हाय हकीकत   टोंटीलाल
देखा शीशा भरम  बिठाल
चित्रकारी थी  उस दीवाल
गोविंदा की पेंटिंग वाल
समझ से बाहर जादू जाल
गूंगा गमना कुशल क़व्वाल
कैसे बन गया कठिन सवाल
जो भी हो पर टोंटी लाल
मोगम्बो खुश होई गवाल

यह क्या है भई अगड्ताल !

Jul 29, 2015

उड़ी कबूतर काली लाल


उड़ी कबूतर काली लाल
काम धाम जी का जंजाल
दुनिया है मकड़े का जाल
झगड़ झपाटे फटे कपाल
जह देखो तंह खड़ा बवाल
घर घर झगड़े की टकसाल
धरम करम ही करे निहाल


यह ज्ञान कलेजे मोतीलाल
भक्तिभाव से लिया बिठाल
लाख रुपये नकदी तत्काल
बेंक पोस्ट से लिए निकाल
चले सुमिरन नन्द गोपाल
ऋषीकेश मे डेरा डाल
बिस्तर भीतर दाब के माल
भूप करण की सोच मिसाल
जो मांगे दे मोतीलाल
वाह वाह सब गली मोहाल|

एक धूर्त मन कपट बिठाल
फेंका पासा उलटी चाल
आपका बिस्तर लगे सुखाल
देने वाला दीन दयाल
विक्रम नृप की तर्ज सम्हाल
याचक इच्छा सका न टाल

उड़ी कबूतर काली लाल
खो बैठा सब होश हवाल

यह क्या है भई अग्गड्ताल!

गुटरुक पुटरुक गबरू लाल


वीसीपी का खौफ सम्हाल
टीवी चेनल करे धमाल
घर घर फिल्मे पिक्चर हाल
सोच समझ का पड़ा अकाल
ज्ञान मामूली बोदे हाल

जांच कर्ता शाला पहुंचाल
पास आठवीं तोबा लाल
से राष्ट्रपिता का नाम पूछाल
मुँह फुलाकर तोबालाल
मै क्या जानू राष्ट्र पिताल
ट्यूटर टीचर नहीं पढ़ाल
मम्मी कहती मेरे लाल
तेरे पिता हैं गोबालाल

गर्द पर्त संस्कारों जाल
फ्री सेक्स की गड़बड़ झाल
जाडा लगे खटिया सरकाल
चोली टुक्की क्यों है लाल
लाल के पीछे क्या है माल
गाते बच्चे गली मोहाल

मार धाड़ हिंसा की ताल
हीरो फाईटिंग कंठ बिठाल
खल नायक की तर्ज संभाल
ड़ूश ड़ूश करते बाल गोपाल

गुटरुक पुटरुक गबरू लाल
सौ कुत्तों पर एक गुवाल
मुश्किल से ही लगे निकाल
कैसे कहूँ रे कचरुलाल
जूते ज्यादा थौड़े बाल
यह क्या है भई अगगड़ ताल !

Jul 28, 2015

लगा नकद मे भारी माल

रमूज  स्वप्न  इसकीमी ढाल
पकड़ मुफ्त का ढूंडे  माल
नो  नब्बे  सट्टे   की चाल
बाय चांस   ही करे निहाल

आशावादी   रूप     संभाल
मृग तृष्णा  के मिथ्या  जाल
करम कूट  मकड़े के जाल
फंसे  हँसे  रोये कई   लाल

कोई  नहीं  है   सिद्ध   सकाल
जो फिक्स आंकड़ा देय बिठाल
लगाईवाल का एल्यूमिन  माल
खाईवाल  घर  सोना    थाल


चोरी  से  है    ये     फिकराल
लगाई वाल  का कीमती माल
गिरवी वाले रहे  संभाल

आता जाता दिखता माल
घाटे का है  खड़ा सवाल
मगज मारी का मेल माल
राम  भरोसे  देता  माल
कस के पकड़ो फेल फाल

बोदरेशन  महा   कपाल
खतम होय इसी युकताल
दफना दे सट्टा    तत्काल

या डबल   भूमिका तुरंत बिठाल
बन खाईवाल खुद लगाईवाल
लगा नकद मे भारी माल
खुले तो घर का घर मे माल

यह क्या है भई अग्गड़ताल !

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Jul 27, 2015

की मैंने पक्की पड़ताल



डट्ट  लट्ठ   फट   झोटेलाल
ए  चक आँखें बाक्स टपाल
सीताफल की ऊपर  छाल
जैसे  गड्डे  चेचक  वाल
चेहरे पर दिक्खे विकराल

कहे सुनो  मेरी  पब्लिकलाल
की मैंने पक्की पड़ताल
राजनीति की पक्की   चाल
झूठे  वादे थोथे   गाल
मनमोहन  नरसिन्हा लाल
महंगाई  नहीं सके संभाल
चंद चतुर जन चांदी थाल
गटके  सटके  माल मताल

गले गधे की मोती माल
खुर खच्चर   सोने की नाल
हाय हाय रे राम दयाल
याद आए वो  डायलगाल
अमजद  गब्बर  शोलेवाल
तेरा कालिया क्या होगाल

सौ दिन का आपरेशन   टाल
घी गुड शक्कर राशन दाल
आसमान पे दिये     उछाल
सस्ताई    पगडंडी      जाल
काले  कांटे  भाटे    लाल
दूभर चलना मुश्किल हाल


रोजी रोटी  का खास सवाल
महंगाई की फंसा   डगाल
गीला न शिकवा   अपने हाल
घने कोहरे उपट   चाल
देश के लाखों नौनिहाल
चले राम की टेक संभाल

यह क्या है भई  अगगड़ताल !

Jul 24, 2015

वाह ! शनि तेरी नहीं मिसाल


खटर पटर  खट संकटलाल
शनि देव ने  सोची  चाल
किसे करूँ मैं  हाल बेहाल
दुखी मुखी   भूखा   कंगाल

दिखा सामने  रुक्का लाल
कहे शनि मेरे बात न टाल
झट कबाड़ का ले ले   माल
मौज करेगा सालों साल

भ्रष्ट  मती भई  रुक्का लाल
आबाड़  कबाड़ का रिस्की  माल
  डोड़ा चुरा  महुआ     छाल
घर भर लीना रुक्का लाल

वाह शनि तेरी नहीं मिसाल
मुखबीरों का फेला     जाल
बता दिया कहाँ रक्खा   माल
पुलिस गेंग ने छापा  डाल
सजा करा दी  ढाई   साल

यह क्या है भई  अगगडताल!

Jul 20, 2015

मर्दों का नहीं पड़ा अकाल


कपटी कौव्वा हंसा चाल
खुद  फंसा  अपने ही जाल
घर जोरू पर  रोब  उंडाल
कहे व्यंग मे बात उछाल

कमर कटीली  खुदरे  गाल
बाल झोंपड़ा  जंगल   जाल
भूत कोठी  सा रूप डराल
तुमसे पूछूँ  एक सवाल

खानदान की इज्जत पाल
निकाह को मैं  देता   टाल
प्यार मोहब्बत साल संभाल
मगर तेरा क्या होता हाल ?

बीबी बोली धत्त  कमाल
रुण्ड मुंड खरदूषन लाल
ओदर  बोदर  कंडम  माल
तन बासे मुर्दा  हप्ताल

रे  मेरे तम्बू   तिरपाल
मर्दों का नहीं पड़ा अकाल
देवर  कहता  नहीं थकाल
भाभी अपना रूप संभाल
बिन दीपक और बिना मशाल
तुझसे ही सब रोशन हाल

यह क्या है  भई अग्गड्ताल!